Sunday, April 12, 2020

हाथ मिलाने से भी महरूम रहे

हाथ मिलाने से भी महरूम रहे
आज तक बनते रहे हैं जो हमारे ज़ामिनउन से हम हाथ मिलाने से भी महरूम रहे– जगदीश प्रकाश अजनबी रंग छलकता हो अगर आँखों सेउन से फिर हाथ मिलाने की ज़रूरत क्या है– नदीम गुल्लानीवक़्त के साथ ‘सदा’ बदले तअल्लुक़ कितनेतब गले मिलते थे अब हाथ मिलाया न गया– सदा अम्बालवीवो वक़्त...

हम quarantine मे रह गए,

हम quarantine मे रह गए,
जवानी के दिन चमकीले हो गए,हुस्न के तेवर नुकीले हो गए,हम quarantine मे रह गए,उधर उनके हाथ पीले हो गए। गहरी आंखो के समंदर मे उतार जाने दे,प्यार का मुजरिम हूँ मुझे डूब मर जाने दे,बिल कितने तेरे फोन के भरे है मैंने,सब कुछ वापस चाहिए बस मुझे quarantine से वापस आने...

अपने ख़िलाफ़ फैसला ख़ुद ही लिखा

अपने ख़िलाफ़ फैसला ख़ुद ही लिखा
अपने ख़िलाफ़ फैसला ख़ुद ही लिखा है आपनेहाथ भी मल रहे हैं आप, आप बहुत अजीब हैं अब नहीं बात कोई ख़तरे कीअब सभी को सभी से ख़तरा हैकोई हाथ भी न मिलाएगा जो गले मिलोगे तपाक सेये नए मिज़ाज का शहर है ज़रा फासले से मिला करोये जो मिलाते फिरते हो तुम हर किसी से हाथऐसा न...

जरा सी कैद से

जरा सी कैद से
जरा सी कैद से घुटन तुम्हें होने लगी,  तुम्हें तो पंक्षी की कैद सदा भली लगी..।’ ‘इक मुद्दत से आरजू थी फुरसत की....मिली तो इस शर्त पे कि किसी से ना मिलो।’ कल तक जो कहते थे मरने की फुर्सत नहीं,आज वो बैठकर सोचते हैं जिएं कैसे..।’ सारे मुल्कों को नाज था अपने-अपने...

कोरोना शेर

कोरोना शेर
ये कह के दिल ने मिरे हौसले बढ़ाए हैंग़मों की धूप के आगे ख़ुशी के साए हैं- माहिर-उल क़ादरी हार हो जाती है जब मान लिया जाता हैजीत तब होती है जब ठान लिया जाता है- शकील आज़मीवक़्त की गर्दिशों का ग़म न करोहौसले मुश्किलों में पलते हैं- महफूजुर्रहमान आदिलदुनिया...