अब कुछ और नही उगता, तेरी यादों के सिवा,,अब मेरे दिल की ज़मीन पर, बस तेरी ज़मींदारी है....@ShayariByArsalan
तुम्हारी ज़िद, तुम्हारे उसूल, तुम्हारे नियम, कौन जाने कौन से संविधान की धारा हो तुम... @ShayariByArsalanसोचते हैं सीख लें हम भी बेरुखी...
अब कुछ और नही उगता, तेरी यादों के सिवा

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