फितरत-ए-गिरगिट इंसानों की देख, गिरगिट भीहैरान सा है!!!कहता है गिरगिट हवाओं से, इंसान क्यूं इतना"बे-ईमान" सा है???@ShayariByArsalanसुनो,तुम्हारे साथ बूढ़ा होना चाहता हूँ मैं.....तुम्हारे कारण नहीं.................!!!@ShayariByArsalanपत्थर हैं ठोकरों से तराशे जाएँगेमोम नहीं...
फितरत-ए-गिरगिट इंसानों की देख, गिरगिट भी

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