एक सिगरेट सी मिली तू मुझे..ए आशिकी कश एक पल का लगाया था लत उम्र भर की लग गयी।जी करता है चला जाऊं, हसीनों की महफिल में..पर क्या करूं ये मेरे दोस्तो, उतना दम ही नहीं है दिल में।एक तु मिल जाती तो किसी का कया चला जाता..तुझे उमर भर के लिए खुशीयाँ ही खुशीयाँ और मुझको...
एक सिगरेट सी मिली
